"अगर है कोई ज़मी और है कोई आसमाँ,
है कोई जन्नत इस जहाँ में तो वो है मेरी माँ"
आज विश्व महिला दिवस है फेसबुक, व्हाट्सएप्प और हर एक सोशल साइट पर एक से बढ़कर एक मैसेज, फ़ोटो और कविता लिखी जा रही है। किन्तु वास्तविकता में ये सब केवल एक दिखावा मात्र है जो आपको संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त है।खैर जो भी है सबको अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार है।
तो शुरुआत करते है अभी कल ही मैने ABP News के फेसबुक पोस्ट में पढ़ा की एशिया का सबसे बड़े रेड लाइट एरिया सोनागाछी (पश्चिम बंगाल) में है। इसके अलावा मुम्बई का कमाठीपुरा, दिल्ली का जीबी रोड एरिया, रेशमपुरा (ग्वालियर, मध्यप्रदेश) और भी ना जाने देश में कितने ऐसे इलाके है जहा महिलाओ को या तो जबरन इसमें धकेल दिया जाता है या तो फिर मज़बूरी उन्हें खीच लाती है।
http://abpnews.abplive.in/photo-gallery/red-light-areas-in-india-62885/?gallery-image=1
कुछ महिलाओं से जब इस बारे में प्रश्न किया गया तो वे कहती है कि जब कुछ नही करती थी तब बच्चों के लिये दो वक़्त की रोटी का इंतज़ाम करना मुश्किल था और आज हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे है, कॉलेज जा रहे है। एक महिला के अनुसार जब वो किसी के घर काम पे जाती थी तो उसे 1500₹ प्रतिमाह मिलते थे पर आज वो 15000₹ प्रतिमाह कमा रही है। निश्चय ही ये महिलाये अपना जीवन यापन और अपने बच्चों की परवरिश अच्छे से कर रही हो किन्तु क्या हम भी इसे स्वीकार कर ले कि हमारे ही समाज का एक महत्वपूर्ण अंग ऐसे कार्य को करने के लिए मजबूर है या हम में से ही कुछ लोगो द्वारा जबरन करवाया जा रहा है।
हमे सोचने की और जागने की आवश्यकता है एक तरफ हमारे देश की महिलाये खेल जगत, राजनीति, सामजिक कार्यकर्ता, बैंकिंग और न जाने कितने क्षेत्रो में पुरुषो को टक्कर दे रही है वही हमारी ही कुछ अपनी महिलाये आज भी समाज से जुड़ने की बजाय समाज से जुदा है।
हाल में ही मध्यप्रदेश की विधानसभा में गृहमंत्री ने जानकारी दी की मध्यप्रदेश से रोज 60 महिलाये गायब हो रही है, जिनमे से अधिकतर महिलाये जनजाति वर्ग की है। इन महिलाओ को सिर्फ और सिर्फ देह व्यापर के लिए बेचा और ख़रीदा जाता है। क्या औरत केवल एक व्यापार करने वाली चीज़ है?
क्या उसका औचित्य केवल पुरुष की इच्छा मात्र तक है की जब मन हुआ तब तन से लगा लिया और जब मन हुआ फेक दिया?
बिलकुल नहीं, स्त्री मात्र भोग के लिए नहीं है वह स्वयं में एक सम्पूर्ण ब्रम्हांड है वह सृष्टि निर्माता है। हमे समझना होगा जब हम एक शर्ट को लगातार 9 दिन लगातार नहीं पहन सकते तो फिर हमारी माँ ने हमे 9 माह अपने गर्भ में कैसे रखा होगा? हमें जागने की आवश्यकता है और साथ ही ये भी समझने की, कि क्या हम समाज में वास्तव में जी रहे है या केवल साँसे ले रहे है?
घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण न जाने कितने अपराध मौजूदा परिवेश में हो रहे है और हम सिर्फ न्यूज़ में देखकर, पेपर में पढ़कर भूल जाते है। http://sachtimes.com/hindi/india/3251-महिलाओ-के-विरूद्ध-अपराध-की-खबर-सुनते-ही-झुक-जाता-है-लज्जा-से-सिर,-मोदी
हमारा कर्तव्य है क़ि आसपास यदि कही ऐसा हो रहा है या होता है तो तुरन्त उसे रोके क्योंकि कल ये हमारे साथ भी हो सकता है।
न जाने कितने अपराध महिलाओ को लेकर हो रहे है किन्तु।अब हमे इनसे निपटना होगा मजबूती के साथ इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है जागरूकता, महिलाओ को अपने अधिकार जानना जरुरी है। इसके लिए आवश्यक है हम अपनी बच्चियो को खूब पढ़ाए, उन्हें अनुशासन में तो रखे किन्तु उनके विचारो को समझे साथ ही उन्हें अपनी बात रखने का मौका दे।
महिलाओ के प्रति दूषित सोच रखने वाले जान ले और सुन ले नारी मजबूर नहीं मजबूत है।
अंत में इतना ही कहना है आज 8 मार्च 2016 से अगले 8 मार्च 2017 तक यदि हम एक भी अपराध रोकते है तो वही दिन सच्चा महिला दिवस होगा।
सभी महिलाओ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाये व पुरुषो को उनके संरक्षण व सम्मान की जिम्मेदारी।
आपने इतना ध्यानपूर्वक पड़ा इस हेतु धन्यवाद।
किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि या सुझाव हो तो जरूर मेल करे।
rachit.mypoems@gmail.com
आपका अपना
रचित "PARiCHiT"
है कोई जन्नत इस जहाँ में तो वो है मेरी माँ"
आज विश्व महिला दिवस है फेसबुक, व्हाट्सएप्प और हर एक सोशल साइट पर एक से बढ़कर एक मैसेज, फ़ोटो और कविता लिखी जा रही है। किन्तु वास्तविकता में ये सब केवल एक दिखावा मात्र है जो आपको संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त है।खैर जो भी है सबको अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार है।
तो शुरुआत करते है अभी कल ही मैने ABP News के फेसबुक पोस्ट में पढ़ा की एशिया का सबसे बड़े रेड लाइट एरिया सोनागाछी (पश्चिम बंगाल) में है। इसके अलावा मुम्बई का कमाठीपुरा, दिल्ली का जीबी रोड एरिया, रेशमपुरा (ग्वालियर, मध्यप्रदेश) और भी ना जाने देश में कितने ऐसे इलाके है जहा महिलाओ को या तो जबरन इसमें धकेल दिया जाता है या तो फिर मज़बूरी उन्हें खीच लाती है।
http://abpnews.abplive.in/photo-gallery/red-light-areas-in-india-62885/?gallery-image=1
कुछ महिलाओं से जब इस बारे में प्रश्न किया गया तो वे कहती है कि जब कुछ नही करती थी तब बच्चों के लिये दो वक़्त की रोटी का इंतज़ाम करना मुश्किल था और आज हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे है, कॉलेज जा रहे है। एक महिला के अनुसार जब वो किसी के घर काम पे जाती थी तो उसे 1500₹ प्रतिमाह मिलते थे पर आज वो 15000₹ प्रतिमाह कमा रही है। निश्चय ही ये महिलाये अपना जीवन यापन और अपने बच्चों की परवरिश अच्छे से कर रही हो किन्तु क्या हम भी इसे स्वीकार कर ले कि हमारे ही समाज का एक महत्वपूर्ण अंग ऐसे कार्य को करने के लिए मजबूर है या हम में से ही कुछ लोगो द्वारा जबरन करवाया जा रहा है।
हमे सोचने की और जागने की आवश्यकता है एक तरफ हमारे देश की महिलाये खेल जगत, राजनीति, सामजिक कार्यकर्ता, बैंकिंग और न जाने कितने क्षेत्रो में पुरुषो को टक्कर दे रही है वही हमारी ही कुछ अपनी महिलाये आज भी समाज से जुड़ने की बजाय समाज से जुदा है।
हाल में ही मध्यप्रदेश की विधानसभा में गृहमंत्री ने जानकारी दी की मध्यप्रदेश से रोज 60 महिलाये गायब हो रही है, जिनमे से अधिकतर महिलाये जनजाति वर्ग की है। इन महिलाओ को सिर्फ और सिर्फ देह व्यापर के लिए बेचा और ख़रीदा जाता है। क्या औरत केवल एक व्यापार करने वाली चीज़ है?
क्या उसका औचित्य केवल पुरुष की इच्छा मात्र तक है की जब मन हुआ तब तन से लगा लिया और जब मन हुआ फेक दिया?
बिलकुल नहीं, स्त्री मात्र भोग के लिए नहीं है वह स्वयं में एक सम्पूर्ण ब्रम्हांड है वह सृष्टि निर्माता है। हमे समझना होगा जब हम एक शर्ट को लगातार 9 दिन लगातार नहीं पहन सकते तो फिर हमारी माँ ने हमे 9 माह अपने गर्भ में कैसे रखा होगा? हमें जागने की आवश्यकता है और साथ ही ये भी समझने की, कि क्या हम समाज में वास्तव में जी रहे है या केवल साँसे ले रहे है?
घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण न जाने कितने अपराध मौजूदा परिवेश में हो रहे है और हम सिर्फ न्यूज़ में देखकर, पेपर में पढ़कर भूल जाते है। http://sachtimes.com/hindi/india/3251-महिलाओ-के-विरूद्ध-अपराध-की-खबर-सुनते-ही-झुक-जाता-है-लज्जा-से-सिर,-मोदी
हमारा कर्तव्य है क़ि आसपास यदि कही ऐसा हो रहा है या होता है तो तुरन्त उसे रोके क्योंकि कल ये हमारे साथ भी हो सकता है।
न जाने कितने अपराध महिलाओ को लेकर हो रहे है किन्तु।अब हमे इनसे निपटना होगा मजबूती के साथ इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है जागरूकता, महिलाओ को अपने अधिकार जानना जरुरी है। इसके लिए आवश्यक है हम अपनी बच्चियो को खूब पढ़ाए, उन्हें अनुशासन में तो रखे किन्तु उनके विचारो को समझे साथ ही उन्हें अपनी बात रखने का मौका दे।
महिलाओ के प्रति दूषित सोच रखने वाले जान ले और सुन ले नारी मजबूर नहीं मजबूत है।
अंत में इतना ही कहना है आज 8 मार्च 2016 से अगले 8 मार्च 2017 तक यदि हम एक भी अपराध रोकते है तो वही दिन सच्चा महिला दिवस होगा।
सभी महिलाओ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाये व पुरुषो को उनके संरक्षण व सम्मान की जिम्मेदारी।
आपने इतना ध्यानपूर्वक पड़ा इस हेतु धन्यवाद।
किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि या सुझाव हो तो जरूर मेल करे।
rachit.mypoems@gmail.com
आपका अपना
रचित "PARiCHiT"

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